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Tuesday, January 9, 2024

Barahmasa - Kis mahine Kya khaye kya na khaye

क्या खाये 

चैते चना वैशाखे तेल जेठे शयन आसाढे खेल 

सावन हर्रे भादो तिल कुवार मास गुड़ सेवे नित 

कार्तिक मूली  अगहन तेल पूस में करो दूध से मेल 

माघ मास  गुड़ खीचड़ खाये  फागुन उठ प्रात नहाये। 


क्या न खाये 

चैते गुड़ वैशाखे तेल। जेठ के पंत अषाढे बेल। 

सावन साग भादो दही। कुवार करेला कार्तिक दही 

अगहन जीरा पूसे  धना। माघे मिश्री फाल्गुन चना 

जो कोई इतने परिहरे। ता घर बैद पद नहीं धरे। 


मास  अंग्रेजी महीना  क्या खाये  क्या नहीं खाये 
चैत्र ( चैत)
मार्च - अप्रैल 
 चना 
 गुड़ 
वैशाख 
अप्रैल - मई 
 बेल 
 तेल 
ज्येष्ठ ( जेठ)
मई- जून 
 अधिक शयन 
 चलना खेलना 
आषाढ़ 
जून - जुलाई 
 खूब खेल , कसरत 
 हरी सब्जियां , बेल 
श्रावण ( सावन)
जुलाई - अगस्त 
 हर्रे 
 साग हरी सब्जियां 
भाद्रपक्ष ( भादो)
अगस्त - सितम्बर 
 तिल 
 दही 
आश्विन ( कुवार) 
सितम्बर - अक्टूबर 
 गुड़ 
 करेला 
कार्तिक 
अक्टूबर - नवंबर 
 मूली 
 दही 
मार्गशीर्ष ( अगहन) 
नवंबर - दिसंबर 
 तेल 
 जीरा 
पौष ( पूस)
दिसंबर - जनवरी 
 दूध 
 धनिया 
माघ 
जनवरी - फरवरी 
 घी खिचड़ी 
 मिश्री 
फाल्गुन ( फागुन)
फरवरी - मार्च 
 सुबह उठ कर नहाये 
 चना 

Sunday, February 24, 2013

Bhojpuri veer ras - Daso noh jor

मेरे पापा (श्री देवकी नंदन मिश्र ) द्वारा लिखित यह कविता बचपन से हम सुनते आ रहे हैं।
अद्भुत वीर रस से पूरित यह कविता १९६१-६२ भारत चीन युद्ध पर आधारित है।

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दसो नोह ज़ोर शारदा से करी अर्जी हम कलम के बनायी आज हमरा लौर दा
ख़ौरे दा मुदई के हमरा के नीके से नाही ता हमरा के निपटे ख़ौर दा बहुत गीत गवनी अब गाइब लौटला पे भारत माता के बचाए के हमारा मौर दा


कलम बर्दााई के तेज बनल नाच उठल भाला मतवाला बा ऐंठत परताप के चेतक चिनहात हिनहिनात बाटे इरखा पे पेकिंग डर मानता पोरस के ताप के मकमोहन बूझअ ता लक्ष्मण के पारल हा .. लाँघी से काहे ना खून फेंक मार जाई
भारत माता के जे चाही चोरवाल ता काहे ना रावण फतिंगास जर जाइ




लागि केहुनाठ जामवंत हनुमंत के ता। . भूभुर भर भुरकुस में पेट कुनिये पड जाई
कैलो अनेत भला निबहे ला जिंदगी भर। . छू दिहले पंजरी चराक दे चरक जाई

लगा के मुल्तानी पटाक से पटक देम। . पाइब अकेला में चाहे दुकेला में
सहका जन . लउर जो उठाईब त हुमच के हुरवठ देम डाल के घघेला में !!

जैसे कुकुर बिलाई के भभौरे ला। . केतनो केंकियाब बाकी भाभोर देब !
चेला जी. गुरु पे लंगी लगाइबा ता धईला पे चिन्हब न.. लादे खखोर देब !!

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